2.श्री अजितनाथ भगवान जैन स्तवन

 

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                      स्तवन - 1

जिन जिन अजितनाथ प्रभु वंदन,

करूं मैं भाव अर्पण।

प्रभु अजितनाथ की महिमा,

जग में अनुपम दर्शन।।


अजितनाथ प्रभु का बल महान,

अचल अडोल निर्वाण।

जो जो शरण प्रभु की आये,

वह पाये मोक्ष दान।।


अजित विजय का चढ़ता झंडा,

मंगलमय काज करे।

जिनवाणी की ज्ञान ज्योति,

अंतर में प्रकाश भरे।।


जय जय जिनराज अजितनाथ,

पापों का नाश करें।

जो भी भजें इनका नाम,

सुख शांति का वास करें।।



                   स्तवन - 2